BADA KAMZOR HAI AADMI

अच्छे हर वक़्त नहीं करते अच्छाई,
बुरे हरदम नहीं करते बुराई।
गर यह छोटी सी बात समझ लें,
यही है ज़िन्दगी की सबसे बड़ी सच्चाई।

संगदिल भी कभी कर जाता है मेहरबानी,
खुद गरज के बस में भी है कुर्बानी।
धोखा दे जाते हैं जो बड़े वफादार थे,
इन्सानों में भी कभी कभी आ जाती है शैतानी।

मैं नहीं कहता किसी का ना कीजिए ऐतबार,
बस हर करतूत को ताज़ा आजमाइए हर बार।
चलते चलते लोग बदल जाते हैं,
जैसे बहार बन जाती है खिजा और खिजा बहार।

सिर्फ खुदा है जो यही था, यही है, यही रहेगा,
यह वो दरिया है जो हमेशा यूं ही बहेगा।
हालात में बदलने का उसका नहीं है दस्तूर,
जो कहेगा वो करेगा, जो करेगा वो कहेगा।

शुभ प्रभात

TU HI TU

आपकी दौलत बस आपके पास है,
कोई भी इसे ले सकता है छीन।
आपका खुदा लेकिन सबकी आस है,
उसी के हैं आप, आसमां और ज़मीन।
वह सब जगह है, वह सबका है।
हर ज़र्रा कायनात का, रब्ब का है।

दौलत के खोने का लगता है डर,
छुपा के रखते हैं कोई और न ले ले।
खुदा को ले जाने दो औरों को भी जी भर,
वही सबको मिलेगा जो वह दे दे।
सर झुका के करो उसकी बंदगी,
उसी की है जान, उसी की है ज़िन्दगी।

कहीं कोई ऐसी हरकत नहीं है,
जो वह नहीं देखता, जो वह नहीं सुनता।
कौन कहता है खुदा की जरूरत नहीं है,
सबकी कहानियां वही तो है बुनता।
खुदा के होने से ही हम हैं,
वह है तो कहां कोई ग़म हैं?

शुभ प्रभात

FIQR AUR GUSSE SE KUCHH NA HOGA HAL

फ़िक्र और गुस्से से कभी नहीं होते मसले हल,
इनसे कभी भी हालात न पाएं हैं बदल।

सोचो अगर कोई मुसीबत आने वाली है,
क्या परेशान या नाराज़ होने से यह जाएगी टल?

दुखी होने से ज़्यादा इसके लिए कुछ करना ज़रूरी है,
इससे पहले कि आज बन जाए कल।

मुश्किलें आएं तो यह बेकार सलाह होगी:
दिन रात फ़िक्र कर और हाथ मल।

गुस्सा भी इसी किस्म की बेफजूल तरकीब है,
काम होता नहीं और बंद हो जाती है अकल।

सोचते रहने से मुद्दे और बदतर ही बनेंगे, रवि,
जो कुछ है सुलझाने के लिए, बस यही है पल।

शुभ प्रभात

JAHAN TO MUKAMMAL HI HAI!

दुनिया में जब खामियां नज़र आती हैं,
सोचते हैं रब्ब ने मुकम्मल जहान क्यूं नहीं बनाया?
खुद तो खुदा तकमील की मूरत हैं,
फिर चीज़ों और लोगों में खोट क्यूं भरवाया?

और तो और सब कुछ उनकी तखलीक में फानी है,
सबको दाइम भी तो बना सकते थे।
सब कुछ चंद रोज़ के लिए जैसे बहता पानी है,
मुस्तकिल बनाने से खुदा क्यूं डरते थे?

सबसे पहले तो एक बात की सबको पहचान है,
खुदा की कायनात तो करोड़ों सालों से यहीं है।
सिर्फ इसलिए के हम सब चंद रोज़ के मेहमान हैं,
क्यूं हम कहते हैं खुदा की खुदाई मुस्तकिल नहीं है?

जो कुछ दिखता है हमें फ़ानी खुदा की खुदाई में,
वो सिर्फ एक सूरत से दूसरी बदलता है,
जैसे सूरज या चांद दिखता है अंगड़ाई में,
यूं कि कभी ढलता है और कभी निकलता है।

जब हमें हर शय के दाइम होने का हो एहसास,
फ़िर हमें पहचान होती है खुदा की खुदाई की।
सब सराब है जो है हमारी इद्राक के पास,
मन की आंखें खोल के समझ आती है सच्चाई की।

शुभ प्रभात

MERE APNE HAIN SAB

दिलों के रिश्ते ख़ून के रिश्तों से भी होते हैं मज़बूत।
कानूनी कागज़ पे लिख के वो नहीं हैं मांगते सबूत।

वैसे सब रिश्ते इन्सान ने खुद बा खुद बनाए हैं,
उनकी बुनियाद क्या है कहां से वो होके आए हैैं?

प्यार से ऊंचा कोई किसी का हो नहीं सकता,
इस बन्धन में कोई किसी को खो नहीं सकता।

न तो शक न बदगुमानी मंडराते हैं इस के करीब,
न यह पूछता है कौन अमीर है और कौन है गरीब।

हमने देखी है भाई भाई, शोहर बीवी, बाप बच्चों में दुश्मनी,
लेकिन दिलों के रिश्तों में ऐसी कभी कहीं नहीं सुनी।

इन्सान का इन्सान से दिलों का रिश्ता होना चाहिए,
सारे ये फूल हैं इन्हें इक धागे में पिरोना चाहिए।

शुभ प्रभात

KHUDA SE PYAR HAI JINKO

तनहाई में कई चेहरे और अफसाने याद आते हैं,
हमारी उदासी में भी वो दिल को लुभाते हैं।

जिन के साथ बिताए थे एक दो पल ही,
वो भी हमें खुशियों का एहसास दिलाते हैं।

फिर खुदा के साथ तो सारी ज़िन्दगी कटी है,
हम उन्हें इतनी आसानी से क्यूं भूल जाते हैं?

गर उनकी इबादत में हम सर झुका लें,
यकीनन गमों के सेहरे बहारों में बदल जाते हैं।

लोग हमें मझदार में छोड़ भी सकते हैं,
खुदा के बंदे हर वक़्त खुदा के ही कहलाते हैं।

रब की पनाह में आसानी से वह सकून मिलता है,
जिसके लिए सभी उंगलियों पे नचाते हैं।

मुहब्बत का सिला लोगों से मिले न मिले, रवि,
सब कुछ मिलता है उन्हें जो खुदा से दिल लगाते हैं।

शुभ प्रभात

SABSE KEEMATI NAZRAANA

कौन कहता है अपने दोस्तों को
बहुत कीमती चीज़ दे सकते हो?
गर वक़्त नहीं दे सके तो सिर्फ
अपनी गफलत के दाग़ भरते हो।

दो पल तो किसी को दे न पाए,
क्या होगा इन नज़रानो से?
दिल बहलाने के ज़रिए बहुत हैं,
पर नहीं बहलता ऐसे बहानो से।

जब बूढ़े हो जाएं मां बाप कभी,
वो तुम्हारे वक़्त के हैं हकदार,
क्या तुम कभी भी न चुकाओगे,
जो ज़िन्दगी भर रहा है उधार?

प्यार की कीमत न लगाना,
आपसे मांगता है छोटी कुर्बानी,
नज़राना दो अपने वक़्त का,
गर कुछ कीमती देने की है ठानी।

शुभ प्रभात।

WO PHIR NAHIN AATE

आवाज़ तक नहीं होती गर टूट जाए प्यार।
पर सुनी नहीं जाती सदा गर टूटे ऐतबार।

बहुत ऐसी चीजें हैं जो जुड़ जाती हैं टूट के,
पर ऐतबार की रह जाती है ज़िन्दगी भर दरार।

ज़िन्दगी भर निभाइए वादा वफादारी से,
वैसे ज़िन्दगी पर किसी का है नहीं इख्तियार।

अपने सदाकत की कभी बोली ना लगवाइए,
एक बार खो दी, मिलती नहीं फ़िर बार बार।

लाइक ए ऐतमाद बनने में लग जाती है उम्र,
पर एक पल में आप बन सकते हो नाकाबिल ए ऐतबार।

यही एक बन्धन है, तोड़ना है बहुत आसान,
पर धीरे धीरे आप होंगें ज़िन्दगी से बेज़ार।

नहीं आते वह पल दोबारा जो फरेब में गंवा दिए,
बन सकते थे साहोकार पर बन बैठे अब कर्ज़दार।

दोस्ती है कायम, रवि, वफादारी के सतून पर,
धोका गर दिया है तो है दुश्मनी का इज़हार।

शुभ प्रभात।

ASHA

मैं हूं आपकी आशा,
हर दम आपके संग रहती हूं।
मुझे आपसे कुछ न चाहिए।
पर ज़रा सोचिए
आपको मुझ से क्या उम्मीदें हैं।
सबसे बड़ी यह है कि,
मैं कभी भी
किसी हालत में,
आपको न छोडूंगी।
२४ घंटे, ३६५ दिन,
मैं आपकी सेवा में लगन रहूंगी।
यकीनन, जब सब आपको
छोड़ दें या नज़र अंदाज़ करें,
मैं नहीं छोडूंगी आपका दामन।
आपकी अंधेरी रातों में
मैं चांद बनके
आपके हालात संवारूंगी।
मैं हूं आपकी रौशनी की किरण,
आपके अकेलेपन का हल,
आपकी मायूसी की आस।
आपकी ज़िन्दगी,
आपकी जान।

आपकी आशा
अगर आपके लिए
इतनी ज़रूरी है
जैसे सांस;
तो क्यूं न आप
दूसरों की आशा
को भी उनके पास
ही रहने दें?
आपकी तरह वह भी,
अपनी आशा के बग़ैर,
नहीं जी सकते।
जब तक है आस,
ज़िन्दगी है पास।
वह आंखों से हुई बोझल,
जीना है मुश्किल।
कोई किसी को
इतना नहीं चाहता
जितना आशा को।

शुभ प्रभात

PEHLE INSAAN, PHIR MAHAAN

उन्हें रंजिश थी ये सोच के वह महान न बन पाए,
हमें तरस आता है कि वह तो इन्सान ही न बन पाए।

क्या गरज है हमें उनसे इतने बड़े वह बन गए,
पर वह रहम दिल तो न थे और मेहरबान भी न बन पाए।

मकबोलियत के पीछे दौड़ते वह उस मकाम पे हैं अब,
इन्सानियत की धुंधली सी पहचान भी न बन पाए।

एक ख्वाब उनका था, लोग झुक कर करें उन्हें सलाम,
आन तो उन में बहुत थी पर शान वो न बन पाए।

लोगों के दिलों को जीतने का रुतबा बुलंद था,
पर इतने थे यह मगरुर, किसी के दिल का अरमान न बन पाए।

चलो छोड़िए इरादे अज़मत के, हमें नहीं बनना उनकी तरह,
आओ किसी के काम आएं, तो क्या गर जहान न बन पाए।

शुभ प्रभात

SHARAD PURNIMA KI BADHAYI

आज फ़िर चांद अपना जलवा हमें दिखलायेगा,
शरद पूर्णिमा में ठंडी खीर हमें खिल्वाएगा।

उधार ली हुई अज़मत सही पर दिखता तो हसीन है,
आज तो पूरा नूर हमें रात को दिखाएगा।

क्या क्या ख्वाहिशें हैं हमारी चांद पे जा बैठें हम,
यह तो हमारा अपना है, हमें भी अपना बनाएगा।

सबसे बड़ी ख्वाहिश है, कुमारियों को मिले कुमार,
व्रत तोड़ते ही उनकी ख्वाहिश का असर आएगा।

हिन्दुस्तानी होने पे क्यूं कर हमें न फक्र हो,
सदियों से हमारी रिवायत है, कौन किसको बताएगा?

चांद, सूरज और सब सयारे हमारे इतिहास से जुड़े हैं,
हर किसी का त्योहार हिन्दुस्तानी ज़रूर मनाएगा।

राफेल की पूजा के गंदे लतीफे बेशक हमने बनाए,
पर अपनी सकाफत पे नाज़ करना कौन हमें सिखाएगा?

JO BOYA WO PAYA

ये तुम्हें क्या मिला है, क्यूं होती है हैरानी?
जैसी करनी वैसी भरनी, यही है बात पुरानी।

“बोया पेड़ बबूल का, आम कहां से खाए”,
फ़िर तुम्हें तुम्हारे फल से इतनी क्यूं है परेशानी?

सबको चकमा दे लोगे, इसका न करो गरूर,
उसके दरबार में दूध का दूध, और होगा पानी का पानी।

खुदा ने बहुत कुछ दिया तुम्हारे हाथ में,
बस यूं कहिए तुमसे ही है तुम्हारी जिंदगानी।

फूल अगर हैं बोए तुमने, कांटे न उग पाएंगे,
बुढ़ापे में वो ही मिलेगा, जो थी तुम्हारी जवानी।

अपने कर्मो की तस्वीर खींच के दिल की एल्बम में रखना,
इन्हीं से बनती जाएगी तुम्हारी अपनी एक कहानी।

शुभ प्रभात।

MAIN KUCHH NAHIN

खुद को अहमियत देने से
खुदा को नहीं समझ सकते,
खुदाई तो इतनी बड़ी है,
तस्सवुर में भी न पहुंच सकते।

खुद को समझना ज़रूरी है,
लेकिन खुद को ना समझें ज़रूरी।
गर ज़माना आपकी अना पे टिका है,
तो यह है आपकी ही मजबूरी।

खुदी को कम करिए,
दूसरों के बारे सोचिए।
खुदाई का जो राज़ है,
अपने दामन में बोचिए।

जब आप समझ जाएंगे,
हर ज़र्रे के साथ जुड़े हैं आप।
फ़िर इसका भी एहसास होगा,
कायनात में अकेले न पड़े हैं आप।

कोई कहीं ऐसा नहीं,
जिसकी आपसे कम एहमियत है,
यही खुदा की पहचान है,
यही खुदाई की असलियत है।

शुभ प्रभात

NEKI KAR DARIYA MEIN DAAL

ज़िन्दगी में आते हैं ऐसे भी मुकाम,
सब ठीक करके भी तूं होता है बदनाम।

बहुत मेहनत से और लगन से किया काम,
न कहीं कोई ईनाम, न कहीं कोई आराम।

एहसान फरामोश हैं सब, नाजायज़ भी,
जिनके लिए दिन रात किए थे हराम।

और फिर कई ऐसे भी दोस्त मिले होंगे,
जिनके बगल में थी छुरी और मूंह में राम राम।

उदास और मायूस हैं तूं, क्या करूं, किधर जायूं,
क्या नेकी और सच्चाई का यही है अंजाम?

तेरी अच्छाइयां न गलत हैं न बर्बाद होंगी,
पर नतीजे के बारे सोचना नहीं है तेरा काम।

नेकी कर दरिया में डाल, अमली मशवरा है,
छोड़ सब खुदा पे और पा ले अपना आराम।

जो जो जिसको मिलना है, मिल के ही रहेगा,
खुदा की कर बंदगी, सब को झुक के सलाम।

लोगों के सकून – ए – रूह की न फ़िक्र कर, रवि,
सिर्फ अपने ही ज़हनी सकून का कर ले तू इंतज़ाम।

शुभ प्रभात

AAYIYE AAP BHI AAZMAYIYE

एक ज़बरदस्त नुस्खा है,
होंगे आप सुन के हैरान।
मरने वाले को भी गर मिले,
आ जाती है उसमें जान।

बिल्कुल मुफ्त मिलता है,
न किसी का कोई नुकसान।
मुश्किल तो बिल्कुल नहीं,
है सब दवा दारू से आसान।

न देने वालों न लेने वालों को,
देना है किसी को लगान।
न ही इसे खरीदने के लिए,
जाना है किसी दुकान।

कोई नहीं इस नुस्खे से,
कभी होगा अनजान।
किसी भी हालत में करेगा काम,
यह है मेरा ऐलान।

जानवर भी आजमाते हैं,
हम तो हैं फकत इन्सान,
इस नुस्खे को खूब बांटो,
और बन जाओ मेहरबान।

गमों के पहाड़ टूट रहे हों,
उम्मीद का न हो अनुमान।
कहीं से रौशनी न मिले,
न ग्रंथ, न बाइबल, पुराण या कुरान।

आखिर में कहूंगा नुस्खे के लिए,
यह है खुशियों का उन्वान।
अक्लमंद इसे पा लेने के लिए,
कर देते हैं सब कुछ कुर्बान।

बता रहा हूं अब मैं आपको,
हो जाएगा आपको भी गुमान:
होंठों पे रखिए इबादत,
चेहरे पे लाइए मुस्कान।

बांटिए इन्हें लोगों में,
बन के शुक्र गुज़ार इन्सान।
हौले हौले सब ठीक होगा,
आपकी मुस्कान, खुदा की पहचान।

शुभ प्रभात।

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