NA THUKRAYEN ISE

ज़िन्दगी क्या क्या हमें सिखाती है,
हंसते हंसते आंख भर आती है।

मिलने को कभी उन्हें वक़्त नहीं मिलता,
दफअतन ज़िन्दगी ही गुज़र जाती है।

वो जो दिन थे जिन से हम बहुत थे मायूस,
एक दिन उन्हें ही पाने के लिए तरसाती है।

क्यूं न थाम लें वह वक़्त जिस पर होगा नाज़ बाद में,
अक्सर तनहाई में उनकी याद सताती है।

वह जो रहगुजर है प्यार की कल हो न हो,
वीरान हुई तो रह रह के हमें बुलाती है।

आंख है, यह लबों से भी उम्दा बोलती है,
बस कोई सुनने वाला हो जो यह सुनाती है।

दिखती है हमेशा मासूम, कमज़ोर और नादान,
सदियों का बोझ ज़िन्दगी ही तो उठाती है।

ज़िन्दगी है, हम कहते हैं क्या है यह, रवि,
हर रोज़, हर पल, यह हमें समझाती है।

NANAK AAYA, NANAK AAYA

I am giving you three versions of this poem penned by me: In Punjabi, in Punjabi transliteration and finally its translation in English.

First in Punjabi

ਕਈ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਸੀ ਬਾਬਾ,
ਕਈ ਓਹਨਾ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦੇ ਸੀ ਸ਼ਾਹ ਫਕੀਰ।
ਸਭ ਨੂੰ ਇੱਕ ਗਲ ਦਾ ਸੀ ਏਹਸਾਸ,
ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਸੀ ਰੱਬ ਦੀ ਤਸਵੀਰ।

ਅੱਜ ਓਹਨਾ ਦੇ ੫੫੦ ਵੇਂ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਉਤਸਵ ਤੇ,
ਓਹਨਾ ਦੇ ਕੁਛ ਉਪਦੇਸ਼ ਕਰੀਏ ਯਾਦ।
ਅੱਜ ਤਕ ਉਹ ਸਭ ਲਈ ਉਚਿਤ ਨੇ,
ਸਾਡੇ ਪੰਜ ਸੌ ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਵੀ ਬਾਅਦ।

ਸਭ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਹੈ ਓਹਨਾ ਚੀਜ਼ਾਂ ਦਾ ਖੰਡਣ,
ਜਿਹੜੀਆਂ ਹਨ ਸਿਰਫ ਪਦਾਰਥਕ ਪ੍ਰਤੀਕ।
ਬਾਲਕ ਨਾਨਕ ਨੇ ਜਨੇਊ ਪਹਿਨਣ ਤੋਂ ਕੀਤਾ ਇਨਕਾਰ,
ਰਿਤੀਵਾਦੀ ਚੀਜ਼ਾਂ ਚ ਮੈਨੂੰ ਨ ਕਰੋ ਸ਼ਰੀਕ।

ਤਿਨ ਦਿਨ ਕਾਲੀ ਨਦੀ ਦੀ ਸਮਾਧੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ,
ਓਹਨਾ ਨੇ ਦੁਨੀਆ ਨੂੰ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਸਬਕ ਸਿਖਾਇਆ।
ਏਕ ਓਮਕਾਰ ਹੈ ਸਾਰਿਆਂ ਦਾ ਰੱਬ,
ਨਾ ਕੋਈ ਆਪਣਾ ਤੇ ਨਾ ਕੋਈ ਪਰਾਇਆ।

ਆਪਣੇ ਦੋਨੋ ਪੁੱਤਾਂ ਸ੍ਰੀ ਚੰਦ ਤੇ ਲਕਸ਼ਮੀ ਚੰਦ ਨੂੰ,
ਵੰਡ ਛਕੋ, ਕੀਰਤ ਕਰੋ ਅਤੇ ਨਾਮ ਜਪੋ ਦਾ ਦਿੱਤਾ ਉਪਦੇਸ਼।
ਆਪਣੀਆਂ ਪੰਜ ਉਦਾਸੀਆਂ ਚ ਗੁਰੂ ਜੀ ਨੇ,
ਇਹਨਾ ਦਾ ਪ੍ਰਚਾਰ ਕੀਤਾ ਦੇਸ਼ ਵਿਦੇਸ਼।

ਭਾਈ ਲਾਲੋ ਗਰੀਬ ਲੇਕਿਨ ਇਮਾਨਦਾਰ ਦੀ ਰੋਟੀ ਚੋਂ,
ਓਹਨਾ ਨੇ ਦੁੱਧ ਕੱਢ ਕੇ ਦਿਖਾਇਆ।
ਲੇਕਿਨ ਅਮੀਰ ਤੇ ਬੇਰਹਿਮ ਮਲਿਕ ਭਾਗੋ ਦੀ ਰੋਟੀ ਤੋਂ,
ਲਾਲ ਲਾਲ ਖੂਨ ਓਹਨਾ ਨੇ ਕੱਢ ਵੇਖਲਾਇਆ।

ਜਗਨਨਾਥ ਪੁਰੀ ਚ ਗੁਰੂ ਜੀ ਦੀ ਆਰਤੀ ਦਾ ਸਬਕ,
ਮੈਨੂੰ ਸਭ ਤੋਂ ਲਗਦਾ ਹੈ ਉਚਿਤ ਤੇ ਸੁੰਦਰ।
ਗਗਨ ਮੇਂ ਥਾਲ ਰਵਿ ਚੰਦ ਦੀਪਕ,
ਦੀ ਆਰਤੀ ਕਰਕੇ ਜਾਣਾ ਨ ਪਏ ਕਿਸੀ ਵੀ ਮੰਦਰ।

ਹੋਰ ਬਹੁਤ ਨੇ ਅਣਗਿਣਤ ਉਪਦੇਸ਼,
ਜੇਹੜੇ ਮਿਲਦੇ ਨੇ ਓਹਨਾ ਦੇ ਜੀਵਨ ਦੇ ਵਿਸਤਾਰ ਵਿੱਚ,
ਸੱਚਾ ਸੌਦਾ ਅਤੇ ਤੇਰਹ ਤੇਰਹ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਵੀ,
ਬਾਜਰਾ ਕਿਉਂ ਨਾ ਘਟ ਹੋਇਆ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿੱਚ?

ਓਹਨਾ ਦਾ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ ਉਤਸਵ ਮਨਾਉਣ ਲਈ,
ਸਾਡੇ ਸਾਰਿਆਂ ਲਈ ਇਹ ਹੀ ਹੈ ਵਧੀਆ ਤਰਕੀਬ।
ਆਪਣੇ ਜੀਵਨ ਚ ਓਹਨਾ ਦੀਆਂ ਸਿੱਖਿਆ ਨੂੰ ਅਪਣਾਈਏ,
ਅਤੇ ਵਾਹਿਗੁਰੂ ਦੇ ਅਸੀਂ ਵੀ ਹੋ ਜਾਈਏ ਕਰੀਬ।

ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਦੇ ਗੁਰਪੁਰਬ ਨੂੰ ਅੱਜ ਦੇ ਦਿਨ,
ਚਲੋ ਉਸ ਦਰੱਖਤ ਥੱਲੇ ਬੈਠੀਏ ਜਿਹੜਾ ਓਹਨਾ ਨੇ ਬੋਇਆ।
ਸਾਧ ਸੰਗਤ ਜੀ, ਸਤਿਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਪਰਗਟਿਆ,
ਮਿੱਟੀ ਧੁੰਦ ਜਗ ਚਾਨਣ ਹੋਇਆ।

Now in Punjabi Transliteration

Kayi ohna nu kehnde si Baba,
Kayi ohna nu kehnde si Shah Fakir.
Sab nu ik gal da si ehsaas,
Guru Nank si rabb di tasveer.

Ajj ohna de 550 ve prakash utsav te,
Ohna de kuchh updesh kariye yaad.
Ajj taq oh sab layi uchit ne,
Sade panj saalan tonh wi baad.

Sab tonh pehlan hai ohna cheezan da khandan,
Jehdiyan han sirf padarthak prateek.
Balak Nank ne janeyu pehnan tonh keeta inkaar,
Ritiwadi cheezan ch mainu na karo shareek.

Tin din Kali Nadi di samadhi tonh baad,
Ohna ne duniya nu sab tonh wadda sabak sikhayiya.
Ek Omkar hai sareyan da rabb,
Na koi aapna te naa koi prayaya.

Aapne donon puttan Sri Chand te Lakshmi Chand nu,
Vand chhako, Kirat karo ate naam japo da ditta updesh.
Aapniyan panj udasiyan ch Guru ji ne,
Ehna da prachaar keeta desh videsh.

Bhai Lallo gareeb lekin imaandar di roti chon,
Ohna ne dudh kadd ke dikhayiya.
Lekin ameer te beraham Malik Bhago di roti chon,
Laal laal khoon ohna ne kadd vekhlayiya.

Jagannath Puri ch Guru hi di aarti da sabak,
Mainu sab tonh lagda hai uchit te sundar.
Gagan mein thal ravi chand deepak,
Di aarti karke jaana na paye kisi bhi mandir.

Hor bahut ne anginat updesh,
jehde milde ne ohna de jeevan de vistaar vich.
Sachcha Sauda ate terah terah karan tonh baad vi,
Baajra kyun na ghat hoyiya bazaar vich?

Ohna da prakash utsav manayun layi,
Saade sareyan layi eh hi hai vadhiya tarkeeb.
Aapne jeevan ch ohna diyan sikhiyan nu apnayiye,
Ate Waheguru de asin vi ho jayiye kareeb.

Guru Nanak de Gurpurab nu ajj de din,,
Chalo us drakhat the thalle baithiye jehda ohna ne boya.
Saadh Sangat ji, Satguru Nanak pragateya,
Mitti dhund jag channan hoya.

(Pic courtesy: timesnownews.com)

And finally the Translation

Some used to call him Baba,
Some used to call him Shah Fakir.
All felt one thing common,
Guru Nanak was the picture of God.

Today on his 550th Birth Anniversary,
Lets recall some of his teachings.
These are still relevant for all of us,
Even after five and a half centuries later.

First is how he denigrated those things,
Which are only material symbols.
Boy Nanak refused to wear the Janeyu,
He asked not to be included in mere rituals.

After spending three days in Kali Nadi (Black River),
He gave the world the biggest preaching:
One God is everyone’s God,
He isn’t yours alone.

To both his sons Sri Chand and Lakshmi Chand,
He preached Vand chhako (Share with others in need), Kirat karo (Earn or make a living honestly without fraud or exploitation) and Naam japo (Meditate on God’s name).
During his five Udasis (Travels) the Guru,
Such preaching he gave within India and abroad.

From the roti of Bhai Lallo who was poor but honest,
He showed milk flowing out.
But from the roti of rich but cruel Malik Bhago,
He produced red blood.

In Jagannath Puri he gave the lesson of Aarti,
I find it apt and beautiful:
Gagan mein thal ravi chand deepak (The sun and moon, O Lord, are thy lamps)
With this Aarti there won’t be a need to visit any temple (as one can connect directly with God).

There are many more countless teachings,
That we can find in his biography.
Even after Sachcha Sauda and terah terah of his,
Why didn’t the grains get less in the market?

For celebrating his birthday,
All of us have the best approach.
In adopting in our life his (Nanak’s) teachings.
And with that we can be closer to Waheguru.

On this day of Guru Nanak’s Gurpurab,
Lets sit in the shade of the tree he sowed as a seed.
Respected saintly gathering, with the emergence of the complete Guru, Guru Nanak,
the worldly mist was cleared and the whole world was illuminated.

Happy 550 anniversary of Guru Nanak’s Gurpurab

DOST HAI TO SAB KUCHH HAI

दोस्तों के बग़ैर ज़िन्दगी वीरान है,
जिसे दोस्त नहीं चाहिए वह कैसा इन्सान है?

दोस्त होने से हमें हौंसला मिलता है,
कोई तो हमसफ़र है, कोई हम ज़ुबान है।

हमने तो बहुत कुछ पाया है दोस्तों की वजह से,
जहां हम पहुंचें हैं यह दोस्तों का ही एहसान है।

रोते रोते कट जाएं तनहाई के दिन और रातें,
दोस्त है तो रौनक है, होंठों पे मुस्कान है।

दोस्त की कदर करो, यह है खुदा की बख़्शिश,
शुक्र करो खुदा का जब दोस्त मेहरबान है।

थोड़ी सी आपकी ज़रूरत पे वह पहाड़ उठा देगा,
आप हो अगर लक्ष्मण तो वह भी हनुमान है।

और क्या लिखूं, रवि, सब तो जानते हैं,
कौन ऐसा शख्स है जो उसकी खूबियों से अनजान है?

शुभ प्रभात।

ZINDAGI BANAYEN ASAAN

ज़िन्दगी को न हर वक़्त बनाए रखिए संजीदा,
ज़िन्दगी में मज़ाक ढूंडना भी बहुत खूब है अदा।

भगवान का कभी यह इरादा नहीं हो सकता,
सभी उसके बंदे गहरे खयाल में रहेंगे सदा।

थोड़ा सा मुस्करा के उसे खिलता सा चेहरा दिखाना,
खुदा जब तुमसे पूछे अब आगे क्या है रज़ा।

आपके इस अंदाज़ से बहुत मुद्दे हो जाएंगे हल,
वो भी जो शुरू में लगते थे बहुत पेचीदा।

ज़िन्दगी अनमोल है, हर वक़्त परेशानी में न गंवाइए,
बहुत कुछ दिया खुदा ने, हमने ज़राफत को खरीदा।

शुभ प्रभात।

PAAS RAHIYE HAMESHA

जिन्हें पास होना चाहिए वह दूर रहते हैं,
हम सब इन्सान क्यूं इतना मजबूर रहते हैं?

इधर से ही सबको गुजरना है एक दिन,
पर अभी दूर हैं तो हम सब मगरुर रहते हैं।

शबाब है, पैसा है, कामयाबी भी कदम चूमती है,
आंखों में किस किस तरह के सरूर रहते हैं।

कहते हैं हम भी कुछ हैं, कुछ नाम है हमारा,
वरना ऐसे तो न हम इतने मशहूर रहते हैं।

ऐसे में किस को इसका होता है एहसास,
एक दिन सारे ख्वाब सारे मनसूबे चूर रहते हैं।

जिन्होंने इस राज़ को समझ लिया, रवि,
वो खुदा की पनाह में ज़रूर रहते हैं।

शुक्र है खुदा तेरा, जिस हाल में भी हम रहें,
तेरे इरादों से हम हमेशा मंज़ूर रहते हैं।

शुभ प्रभात।

YEH BHI MANN KI BAAT

राह तो बिल्कुल सीधी है,
मोड़ तो सारे मन के हैं।
कशमकश हमारे अंदर है,
हर तरफ इरादे अमन के हैं।

आंखे देखती हैं ख़ाक ओ ज़मीन,
पर दिलकश फूल चमन के हैं।
उदास और तन्हा क्यूं रहते हो,
जब सारे आसार मिलन के हैं?

मरने की बातें न करो कभी,
जब रंग ओ नूर जीवन के हैं।
मायूस अंधेरे में क्यूं रहते हो,
उजाले सूरज की किरण के हैं?

ऐसे तो दिल छोटा न करो,
सब फल तुम्हारी लगन के हैं।
आंखें बंद करके झुक के देखो,
हर क्षण प्रभु के सिमरन के हैं।

कितना कुछ दिया है रब्ब ने,
फ़िर क्यूं ये पल उलझन के हैं?
गर मन ही हमें उदास बनाए,
तो खुशी के लम्हे भी मन के हैं।

शुभ प्रभात।

RABB KI REHMAT KO PEHCHAAN

मुश्किलें आती हैं बनने के लिए आसान,
क्यूं होता है बंदे तू इतना परेशान?

जब भी तू उनको हल करने की करे कोशिश,
तेरे पास नज़र आएंगे तुझे तेरे भगवान।

तुझे लगती हैं मुश्किलें इस वजह से,
क्यूंकि खुदा के तरीकों से तू है अनजान।

जब उसकी समझ तुझे आ जाएगी,
तुझ में आ जाएगी नई एक जान।

तेरे प्यार, मज़हब और ऐतबार का,
यही तो है छोटा सा इम्तिहान।

जो कुछ मिले रह उस की बंदगी में,
मान के उसको रब्ब का वरदान।

JEETE JI MILIYE

जीते जी मिलते रहिए दोस्तों और रिश्तेदारों को,
क्या फायदा होगा मरने के बाद मिलें अपने प्यारों को?

मातम पे आपके जाने से तो वह देख भी न पाएंगे,
क्यूं न मिलें उन्हें डूबने से पहले उनके सितारों को?

बहुत अरसा हो गया पर आपको वक़्त ही नहीं मिला,
कौन अब भरेगा गहरी होती उन दरारों को?

ठीक है नई जगह पर नए दोस्त आपके बन गए,
हैरत है दिल न किया आपका मिलने को पुराने यारों को।

मां बाप, बड़े बूढ़े, गज़ब के इन्सान थे जब थे जवान,
कौन जाने अब देखे ऐसे कमज़ोर बीमारों को?

खिज़ा के सूखे पत्ते आपके चमन में भी बिखरेंगे कभी,
उनको तगाफुल न करें सीने लगा चंद दिन की बहारों को।

आपके प्यार के और वक़्त के हकदार हैं यह सब,
कदमों तले ख़ाक न होने दीजिए हकदारों को।

एक वक़्त था जब आपके सहारे थे यह सभी,
वक़्त से पहले न जाने दीजिए इन सहारों को।

किस्मत के मारे एक दिन गर आप बने तो क्या होगा,
नीचा न दिखाइए कभी आज के किस्मत के मारों को।

शुभ प्रभात।

KAYI ADAKAR, EK KAHANI

हर किसी की कोई न कोई होती है कहानी,
हर झोले में यादें नज़र आती हैं पुरानी।

क्या क्या महल हमने बनाए हैं,
कोई राजा बना कोई बनी है रानी।

सारे जज्बे हर एक ने किए हैं महसूस,
हर एक इन्सान रहा है फानि।

किसी के तजरुबे कुछ ऐसे अलग नहीं,
हर दरिया से गुज़रा है हर तरह का पानी।

फिर भी यह एक अजब हकीकत है,
बेमिसाल होने की है हर एक ने ठानी।

ज़माने आए और बीत गए एक जैसे,
पर हम फ़िर भी करते रहे नादानी।

हर किसी की लगती है नई कहानी,
हर झोले में यादें नज़र आती हैं पुरानी।

शुभ प्रभात।

PAON ZAMEEN PAR

पहुंचने के बाद कभी न भूलें कहां से आप हैं आए,
आज अगर दिलशाद दिन हैं कल मुश्किलों के थे साए।

आपकी कामयाबी देख के चाहने वाले बहुत हैं अब,
हरदम आपको याद रहे जब अपने भी होते थे पराए।

बहुत दिया है देने वाले ने, न करना उसे बर्बाद,
सोच के रखना उन पलों को आंख में थे आंसू भर आए।

इस से हरदम आपके पांव ज़मीन पे रहेंगे मजबूत,
तब भी जब किस्मत के सितारे हों जगमगाए।

देने वाला ले भी सकता है सदा रहे हमें यह याद,
जिन्हें यह सच भूल गया वो दोबारा फिर संभल न पाए।

ज़िन्दगी में बन के रहिए, हमेशा मस्कीन ओ बा अजमत,
कौन जाने किस जगह वक़्त हमें क्या क्या सिखलाए?

हर हालत में हमें रखना, मालिक, आपका होके शुक्रगुजार,
जो भी मिले हम रहें उसे, सर आंखों पे लिए उठाए।

शुभ प्रभात।

HAATH KI LAKEEREN BADAL SAKTA HAI INSAAN

एक तरफ है अपना मुकद्दर,
एक तरफ है कड़ी मेहनत।
जो खून पसीना एक करते हैं,
उनको मिलती है रब्ब की रहमत।

कहते हैं जब ऊपर वाला देता है,
तो देता है वह फाड़ के छप्पड़।
लेकिन जो मेहनत से इतराता है,
भगवान उसको भी देता है थप्पड़।

ठीक है किस्मत दी है खुदा ने,
पर मेहनती लोग हैं उसके क़रीब।
वह भी अमीर बन सकता है,
जो पैदा हुआ था बिल्कुल गरीब।

मुकद्दर भी उनका देता है साथ,
जो बदल दें हाथों की लकीरें।
तारीखी में हमने कई देखें हैं,
तोड़ी हैं जिन्होंने पैरों की जंजीरें।

ना फटकारिए अपने नसीब को,
बैठिए न हाथ पे धर के हाथ।
मेहनत करिए और एहसास यह होगा,
भगवान भी चलेंगे आप के साथ।

देखिए ख्वाब सुनहरे ओ सुहाने,
लेकिन ख्वाब तो ख्वाब रहेंगे।
जब तक तदबीर की बात न माने,
तकदीर के दिन भी ख़राब रहेगें।

शुभ प्रभात।

MAAF KEEJIYE

जो गलती करता है वह इन्सान है,
पर गलती से जो सीखे वह महान है।

किसी की गलती माफ करना मुश्किल ज़रूर है,
पर जो कर दे दानिशमंदी उसकी पहचान है।

है कोई जिसने कभी कोई गलती न की हो?
कौन ऐसा है जो गलती से अनजान है?

माफ़ी देना कभी किसी की कमज़ोरी नहीं,
ऐसी हिम्मत दिखानेवाला सच ही बलवान है।

माफ़ करनेवाला बनता है ज़हनी सुकून का हकदार,
जो न करे वह ज़िन्दगी भर परेशान है।

सख़्त बन के दूसरों की गलतियां निकालना अच्छा नहीं,
उनकी अच्छाइयां ढूंडना चेहरा ए भगवान है।

आपका फराख दिल होना उन्हें बनाता है शुक्र गुज़ार,
तारीफ करते हैं लोग आपकी जो आपका एहसान है।

कहां तो आप ख़रीद लेते ज़िन्दगी भर की दुश्मनी,
कहां आपका कर्जदार अब आप पे कुर्बान है।

शुभ प्रभात।

DAR KAHAN HAI AB?

एक चीज़ जिसके कब्जे में थी मेरी ज़िन्दगी उम्र भर,
और कुछ नहीं उस चीज़ का नाम है डर।

मुझे हर वक़्त वो कहती थी यह कर वह न कर।
धीरे धीरे ज़िन्दगी में बढ़ता गया उसका असर।

हर दम मुझे लगता था किसी की आंखें मुझे देखती हैं,
कुछ भी करूं या सोचूं उनको रहती है खबर।

यह भी लगता था नेकी न करूं तो जहन्नुम जाऊंगा,
पाप करने से कोई काट लेगा मेरे उड़ने के पर।

मौत के बाद मुझे उस आग में जलना होगा,
सैय्याद जहां फैंकेंगे मुझे पिला के ज़हर।

कामयाबी के ख्वाब न करते थे मेरी हौंसला अफजाई,
नाकामी का ख़ौफ जकड़ के करता था मुझे मुतासिर।

बढ़ों से और छोटों से मैं इसलिए डरता था,
मेरे कुछ भी करने से मेरी घट जाएगी कदर।

इस डर से इतना सहमा रहता था मैं,
अंधेरा ही अंधेरा था, कुछ न आता था नज़र।

फ़िर एक दिन खुदा मेरी ज़िन्दगी में आए,
उनके हाथ पकड़ने से मेरा डर गया है मर।

अब मेरी ज़िन्दगी में प्यार की किरणों का उजाला है,
काली डरावनी रात कट गई, देखता हूं सहर।

मेहरबानी खुदा की जिसने बना दिया मुझे निडर,
नए निशाने की खोज में डर घूमता है दर बा दर।

शुभ प्रभात।

KHAYAAL KA KAMAAL

क्या जादुई चीज़ दी खुदा ने कहते हैं इसे खयाल,
इसके इख्तियार में बसा रहता है इन्सान का हाल।

मन में इस तरह यह हरदम यूं उछलता है,
वह पल जिसमें यह न हो, लगता है मुहाल।

क्या अजब है इसकी सिफ्त, हैरत में पड़े हैं हम,
हर सवाल का देता है जवाब, हर जवाब का सवाल।

पैदा होते ही हमें सताने लगता है दिन ओ रात,
फ़िर लगातार आता है, हालांकि सफेद हो जाएं बाल।

जो कहलाते हैं आज़ाद, वह भी रहते हैं इसके गुलाम,
सोच समझ के फंस जाते हैं, बुनता है जब यह जाल।

अमीर बन के रहते हैं, जिन्हें एहसास हो इसकी ताकत का,
कल ही तो उनको देखा था, पैदा हुए थे जो कंगाल।

लोग कहते हैं सारी कायनात माया ही है, रवि,
जो कुछ है वह है हमारे खयाल का कमाल।

शुभ प्रभात।

KOI AITFAAQ NAHIN HOTE

आपकी ज़िन्दगी में जो लोग आते हैं,
हर किसी का है कोई मतलब।
आपकी खुशी का या किसी नसीहत का,
हर आदमी बन जाता है सबब।

कभी सोचा है ऐसे ऐतफाक़ क्यूं होते हैं,
उसी वक़्त क्यूं होते हैं सब?
हो सकता है उनका वहां होना,
खुदा ने उसी तरह लिख रखा हो तब।

कोई ऐतफाक नहीं होते कभी, दोस्त,
सबका करने वाला है वही एक रब्ब।
किसको कैसे और कहां मिलना है,
उसी के हाथ में है कहां और कब।

इसलिए लोगों को मिलते ही,
ये न सोचो क्यूं मिला है यह अब,
खुदा की बख्शीश समझ के सर झुकाओ,
और सोचो न मिलता तो क्या करते तब।

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