एक ज़बरदस्त नुस्खा है,
होंगे आप सुन के हैरान।
मरने वाले को भी गर मिले,
आ जाती है उसमें जान।
बिल्कुल मुफ्त मिलता है,
न किसी का कोई नुकसान।
मुश्किल तो बिल्कुल नहीं,
है सब दवा दारू से आसान।
न देने वालों न लेने वालों को,
देना है किसी को लगान।
न ही इसे खरीदने के लिए,
जाना है किसी दुकान।
कोई नहीं इस नुस्खे से,
कभी होगा अनजान।
किसी भी हालत में करेगा काम,
यह है मेरा ऐलान।
जानवर भी आजमाते हैं,
हम तो हैं फकत इन्सान,
इस नुस्खे को खूब बांटो,
और बन जाओ मेहरबान।
गमों के पहाड़ टूट रहे हों,
उम्मीद का न हो अनुमान।
कहीं से रौशनी न मिले,
न ग्रंथ, न बाइबल, पुराण या कुरान।
आखिर में कहूंगा नुस्खे के लिए,
यह है खुशियों का उन्वान।
अक्लमंद इसे पा लेने के लिए,
कर देते हैं सब कुछ कुर्बान।
बता रहा हूं अब मैं आपको,
हो जाएगा आपको भी गुमान:
होंठों पे रखिए इबादत,
चेहरे पे लाइए मुस्कान।
बांटिए इन्हें लोगों में,
बन के शुक्र गुज़ार इन्सान।
हौले हौले सब ठीक होगा,
आपकी मुस्कान, खुदा की पहचान।
शुभ प्रभात।








