ZINDAGI BANAYEN ASAAN

ज़िन्दगी को न हर वक़्त बनाए रखिए संजीदा,
ज़िन्दगी में मज़ाक ढूंडना भी बहुत खूब है अदा।

भगवान का कभी यह इरादा नहीं हो सकता,
सभी उसके बंदे गहरे खयाल में रहेंगे सदा।

थोड़ा सा मुस्करा के उसे खिलता सा चेहरा दिखाना,
खुदा जब तुमसे पूछे अब आगे क्या है रज़ा।

आपके इस अंदाज़ से बहुत मुद्दे हो जाएंगे हल,
वो भी जो शुरू में लगते थे बहुत पेचीदा।

ज़िन्दगी अनमोल है, हर वक़्त परेशानी में न गंवाइए,
बहुत कुछ दिया खुदा ने, हमने ज़राफत को खरीदा।

शुभ प्रभात

PAAS RAHIYE HAMESHA

जिन्हें पास होना चाहिए वह दूर रहते हैं,
हम सब इन्सान क्यूं इतना मजबूर रहते हैं?

इधर से ही सबको गुजरना है एक दिन,
पर अभी दूर हैं तो हम सब मगरुर रहते हैं।

शबाब है, पैसा है, कामयाबी भी कदम चूमती है,
आंखों में किस किस तरह के सरूर रहते हैं।

कहते हैं हम भी कुछ हैं, कुछ नाम है हमारा,
वरना ऐसे तो न हम इतने मशहूर रहते हैं।

ऐसे में किस को इसका होता है एहसास,
एक दिन सारे ख्वाब सारे मनसूबे चूर रहते हैं।

जिन्होंने इस राज़ को समझ लिया, रवि,
वो खुदा की पनाह में ज़रूर रहते हैं।

शुक्र है खुदा तेरा, जिस हाल में भी हम रहें,
तेरे इरादों से हम हमेशा मंज़ूर रहते हैं।

शुभ प्रभात

YEH BHI MANN KI BAAT

राह तो बिल्कुल सीधी है,
मोड़ तो सारे मन के हैं।
कशमकश हमारे अंदर है,
हर तरफ इरादे अमन के हैं।

आंखे देखती हैं ख़ाक ओ ज़मीन,
पर दिलकश फूल चमन के हैं।
उदास और तन्हा क्यूं रहते हो,
जब सारे आसार मिलन के हैं?

मरने की बातें न करो कभी,
जब रंग ओ नूर जीवन के हैं।
मायूस अंधेरे में क्यूं रहते हो,
उजाले सूरज की किरण के हैं?

ऐसे तो दिल छोटा न करो,
सब फल तुम्हारी लगन के हैं।
आंखें बंद करके झुक के देखो,
हर क्षण प्रभु के सिमरन के हैं।

कितना कुछ दिया है रब्ब ने,
फ़िर क्यूं ये पल उलझन के हैं?
गर मन ही हमें उदास बनाए,
तो खुशी के लम्हे भी मन के हैं।

शुभ प्रभात।

RABB KI REHMAT KO PEHCHAAN

मुश्किलें आती हैं बनने के लिए आसान,
क्यूं होता है बंदे तू इतना परेशान?

जब भी तू उनको हल करने की करे कोशिश,
तेरे पास नज़र आएंगे तुझे तेरे भगवान।

तुझे लगती हैं मुश्किलें इस वजह से,
क्यूंकि खुदा के तरीकों से तू है अनजान।

जब उसकी समझ तुझे आ जाएगी,
तुझ में आ जाएगी नई एक जान।

तेरे प्यार, मज़हब और ऐतबार का,
यही तो है छोटा सा इम्तिहान।

जो कुछ मिले रह उस की बंदगी में,
मान के उसको रब्ब का वरदान।

JEETE JI MILIYE

जीते जी मिलते रहिए दोस्तों और रिश्तेदारों को,
क्या फायदा होगा मरने के बाद मिलें अपने प्यारों को?

मातम पे आपके जाने से तो वह देख भी न पाएंगे,
क्यूं न मिलें उन्हें डूबने से पहले उनके सितारों को?

बहुत अरसा हो गया पर आपको वक़्त ही नहीं मिला,
कौन अब भरेगा गहरी होती उन दरारों को?

ठीक है नई जगह पर नए दोस्त आपके बन गए,
हैरत है दिल न किया आपका मिलने को पुराने यारों को।

मां बाप, बड़े बूढ़े, गज़ब के इन्सान थे जब थे जवान,
कौन जाने अब देखे ऐसे कमज़ोर बीमारों को?

खिज़ा के सूखे पत्ते आपके चमन में भी बिखरेंगे कभी,
उनको तगाफुल न करें सीने लगा चंद दिन की बहारों को।

आपके प्यार के और वक़्त के हकदार हैं यह सब,
कदमों तले ख़ाक न होने दीजिए हकदारों को।

एक वक़्त था जब आपके सहारे थे यह सभी,
वक़्त से पहले न जाने दीजिए इन सहारों को।

किस्मत के मारे एक दिन गर आप बने तो क्या होगा,
नीचा न दिखाइए कभी आज के किस्मत के मारों को।

शुभ प्रभात

KAYI ADAKAR, EK KAHANI

हर किसी की कोई न कोई होती है कहानी,
हर झोले में यादें नज़र आती हैं पुरानी।

क्या क्या महल हमने बनाए हैं,
कोई राजा बना कोई बनी है रानी।

सारे जज्बे हर एक ने किए हैं महसूस,
हर एक इन्सान रहा है फानि।

किसी के तजरुबे कुछ ऐसे अलग नहीं,
हर दरिया से गुज़रा है हर तरह का पानी।

फिर भी यह एक अजब हकीकत है,
बेमिसाल होने की है हर एक ने ठानी।

ज़माने आए और बीत गए एक जैसे,
पर हम फ़िर भी करते रहे नादानी।

हर किसी की लगती है नई कहानी,
हर झोले में यादें नज़र आती हैं पुरानी।

शुभ प्रभात

PAON ZAMEEN PAR

पहुंचने के बाद कभी न भूलें कहां से आप हैं आए,
आज अगर दिलशाद दिन हैं कल मुश्किलों के थे साए।

आपकी कामयाबी देख के चाहने वाले बहुत हैं अब,
हरदम आपको याद रहे जब अपने भी होते थे पराए।

बहुत दिया है देने वाले ने, न करना उसे बर्बाद,
सोच के रखना उन पलों को आंख में थे आंसू भर आए।

इस से हरदम आपके पांव ज़मीन पे रहेंगे मजबूत,
तब भी जब किस्मत के सितारे हों जगमगाए।

देने वाला ले भी सकता है सदा रहे हमें यह याद,
जिन्हें यह सच भूल गया वो दोबारा फिर संभल न पाए।

ज़िन्दगी में बन के रहिए, हमेशा मस्कीन ओ बा अजमत,
कौन जाने किस जगह वक़्त हमें क्या क्या सिखलाए?

हर हालत में हमें रखना, मालिक, आपका होके शुक्रगुजार,
जो भी मिले हम रहें उसे, सर आंखों पे लिए उठाए।

शुभ प्रभात

HAATH KI LAKEEREN BADAL SAKTA HAI INSAAN

एक तरफ है अपना मुकद्दर,
एक तरफ है कड़ी मेहनत।
जो खून पसीना एक करते हैं,
उनको मिलती है रब्ब की रहमत।

कहते हैं जब ऊपर वाला देता है,
तो देता है वह फाड़ के छप्पड़।
लेकिन जो मेहनत से इतराता है,
भगवान उसको भी देता है थप्पड़।

ठीक है किस्मत दी है खुदा ने,
पर मेहनती लोग हैं उसके क़रीब।
वह भी अमीर बन सकता है,
जो पैदा हुआ था बिल्कुल गरीब।

मुकद्दर भी उनका देता है साथ,
जो बदल दें हाथों की लकीरें।
तारीखी में हमने कई देखें हैं,
तोड़ी हैं जिन्होंने पैरों की जंजीरें।

ना फटकारिए अपने नसीब को,
बैठिए न हाथ पे धर के हाथ।
मेहनत करिए और एहसास यह होगा,
भगवान भी चलेंगे आप के साथ।

देखिए ख्वाब सुनहरे ओ सुहाने,
लेकिन ख्वाब तो ख्वाब रहेंगे।
जब तक तदबीर की बात न माने,
तकदीर के दिन भी ख़राब रहेगें।

शुभ प्रभात

MAAF KEEJIYE

जो गलती करता है वह इन्सान है,
पर गलती से जो सीखे वह महान है।

किसी की गलती माफ करना मुश्किल ज़रूर है,
पर जो कर दे दानिशमंदी उसकी पहचान है।

है कोई जिसने कभी कोई गलती न की हो?
कौन ऐसा है जो गलती से अनजान है?

माफ़ी देना कभी किसी की कमज़ोरी नहीं,
ऐसी हिम्मत दिखानेवाला सच ही बलवान है।

माफ़ करनेवाला बनता है ज़हनी सुकून का हकदार,
जो न करे वह ज़िन्दगी भर परेशान है।

सख़्त बन के दूसरों की गलतियां निकालना अच्छा नहीं,
उनकी अच्छाइयां ढूंडना चेहरा ए भगवान है।

आपका फराख दिल होना उन्हें बनाता है शुक्र गुज़ार,
तारीफ करते हैं लोग आपकी जो आपका एहसान है।

कहां तो आप ख़रीद लेते ज़िन्दगी भर की दुश्मनी,
कहां आपका कर्जदार अब आप पे कुर्बान है।

शुभ प्रभात

DAR KAHAN HAI AB?

एक चीज़ जिसके कब्जे में थी मेरी ज़िन्दगी उम्र भर,
और कुछ नहीं उस चीज़ का नाम है डर।

मुझे हर वक़्त वो कहती थी यह कर वह न कर।
धीरे धीरे ज़िन्दगी में बढ़ता गया उसका असर।

हर दम मुझे लगता था किसी की आंखें मुझे देखती हैं,
कुछ भी करूं या सोचूं उनको रहती है खबर।

यह भी लगता था नेकी न करूं तो जहन्नुम जाऊंगा,
पाप करने से कोई काट लेगा मेरे उड़ने के पर।

मौत के बाद मुझे उस आग में जलना होगा,
सैय्याद जहां फैंकेंगे मुझे पिला के ज़हर।

कामयाबी के ख्वाब न करते थे मेरी हौंसला अफजाई,
नाकामी का ख़ौफ जकड़ के करता था मुझे मुतासिर।

बढ़ों से और छोटों से मैं इसलिए डरता था,
मेरे कुछ भी करने से मेरी घट जाएगी कदर।

इस डर से इतना सहमा रहता था मैं,
अंधेरा ही अंधेरा था, कुछ न आता था नज़र।

फ़िर एक दिन खुदा मेरी ज़िन्दगी में आए,
उनके हाथ पकड़ने से मेरा डर गया है मर।

अब मेरी ज़िन्दगी में प्यार की किरणों का उजाला है,
काली डरावनी रात कट गई, देखता हूं सहर।

मेहरबानी खुदा की जिसने बना दिया मुझे निडर,
नए निशाने की खोज में डर घूमता है दर बा दर।

शुभ प्रभात

KHAYAAL KA KAMAAL

क्या जादुई चीज़ दी खुदा ने कहते हैं इसे खयाल,
इसके इख्तियार में बसा रहता है इन्सान का हाल।

मन में इस तरह यह हरदम यूं उछलता है,
वह पल जिसमें यह न हो, लगता है मुहाल।

क्या अजब है इसकी सिफ्त, हैरत में पड़े हैं हम,
हर सवाल का देता है जवाब, हर जवाब का सवाल।

पैदा होते ही हमें सताने लगता है दिन ओ रात,
फ़िर लगातार आता है, हालांकि सफेद हो जाएं बाल।

जो कहलाते हैं आज़ाद, वह भी रहते हैं इसके गुलाम,
सोच समझ के फंस जाते हैं, बुनता है जब यह जाल।

अमीर बन के रहते हैं, जिन्हें एहसास हो इसकी ताकत का,
कल ही तो उनको देखा था, पैदा हुए थे जो कंगाल।

लोग कहते हैं सारी कायनात माया ही है, रवि,
जो कुछ है वह है हमारे खयाल का कमाल।

शुभ प्रभात।

KOI AITFAAQ NAHIN HOTE

आपकी ज़िन्दगी में जो लोग आते हैं,
हर किसी का है कोई मतलब।
आपकी खुशी का या किसी नसीहत का,
हर आदमी बन जाता है सबब।

कभी सोचा है ऐसे ऐतफाक़ क्यूं होते हैं,
उसी वक़्त क्यूं होते हैं सब?
हो सकता है उनका वहां होना,
खुदा ने उसी तरह लिख रखा हो तब।

कोई ऐतफाक नहीं होते कभी, दोस्त,
सबका करने वाला है वही एक रब्ब।
किसको कैसे और कहां मिलना है,
उसी के हाथ में है कहां और कब।

इसलिए लोगों को मिलते ही,
ये न सोचो क्यूं मिला है यह अब,
खुदा की बख्शीश समझ के सर झुकाओ,
और सोचो न मिलता तो क्या करते तब।

DIWALI MUBARAK

सब कुछ खुदा ही करेगा, तो जीने का मकसद क्या है हमारा?
किसी जरूरतमंद का क्यूं हम ही न बन जाएं सहारा?

हो सकता है खुदा ने हमें चुना हो अपना बना के कासिद,
उसकी ज़िम्मेदारियां बांटने के लिए हो उसने हमें पुकारा।

क्या किसी के अश्क पोंछने में हमारी नहीं कोई गर्ज़,
किसी डूबते को हम कभी न दे सकें किनारा?

शायद वो हो उसका मुकद्दर जिसे बेकसी मिली हो,
क्या पता हमारा हो मुकद्दर उसका चलता रहे गुज़ारा।

गर चांद बन के किसी की ज़िन्दगी में न जगमगाएं,
क्या हर्ज़ है कोशिश करें बनने में किसी का सितारा?

इस दिवाली में जलाइए दिए किसी की ज़िन्दगी हो रौशन,
अंधेरे में वो बैठे हैं जिन्हें हो ज़िन्दगी ने मारा।

यह सुनहरा मौका मिला है, खुदा के बनें हम हिस्सेदार,
शायद यह जो हमें मिला है, न मिले कभी दोबारा।

शुभ प्रभात।
शुभ दीपावली।

SAB USI KI MEHARBANI

कोई कितना दूर है, कोई कितना क़रीब है?
यह मुद्दा फासलों का नहीं, अपना अपना नसीब है।

हर खूबी कामिल नहीं, मुत्नसिब ही समझिए,
हमीं कहते हैं यह अमीर है, और वह गरीब है।

आज कोई प्यार से मिले तो वह हमारा हबीब है,
कल वही ललकारे तो कहिए सबसे बड़ा रकीब है।

खुश किस्मत कहते हैं उसे जिसकी पूरी हो मन की मुराद,
नहीं तो ऐलान कर देते हैं बेचारा बदनसीब है।

कभी नहीं हम सोचते खुदा की क्या है रज़ा,
हर माजरे में लगता है किसी आदमी की तरकीब है।

लोग बड़े होशियार, अक्लमंद और सयाने हों, रवि,
जो खुदा की रज़ा समझे मैं कहूंगा वह सबसे नजीब है।

शुभ प्रभात

PAANI MEIN BUDBUDA

ऐसा लगता है हमें कि कुछ हैं हम,
यह कुछ नहीं बस सिर्फ है वहम।
रेत पे चलते हुए कुछ देर नज़र आते हैं:
तुम्हारे भी कदम, हमारे भी कदम।

किसी से पूछना उनके पड़दादे का क्या नाम है,
हमारी ज़िन्दगी यहां छोटा सा मुकाम है,
गर सौ बरस तक तुम्हें कोई याद रखे,
झुक झुक के तुम्हें मेरा सलाम है।

नहीं यकीन तो चलो मिल कर करते हैं एक तजरुबा,
बरस १९२० में कौन थे किसके अब्बा?
कुनबे में और कौन थे, क्या थीं उनकी बातें?
कौन खयाली थे और कौन थे अजूबा?

किसकी नेकियां या बुराइयां आपको हैं याद?
आपने उनके लिए क्या किया उनके जाने के बाद,
कभी तो उनका ज़िक्र ए ज़िन्दगी हुआ होगा?
कभी तो आपने की होगी उनकी रूह के लिए फरियाद।

अगर आपके जवाब ज़्यादा तर हैं “न या नहीं”,
फ़िर अपनी “हम हैं” के लिए क्या ढूंढते हो कहीं?
हमारी ज़िन्दगी है सिर्फ पानी में बुदबुदा,
हम चले जाएंगे ज़माना रह जाएगा यहीं।

इसलिए निकल आयिए अपनी अहमियत के खुमार से,
राज़ी नामा कर लीजिए अपने ही ख़ाकसार से।
फ़िर आज़ाद रहिए गमों से और महरूमी से,
मिटा दीजिए रंग ए गरूर अपने रुखसार से।

मैं कुछ भी नहीं हूं रब्बा, मुझे रख अपने पाओं के पास,
अपनी अहमियत की मेरी मिटा दे तू प्यास।
मैं तेरे बारे अपने से ज़्यादा सोचूं,
तूं ही हो मेरी उम्मीद, तू ही हो मेरी आस।

शुभ प्रभात।

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