क्या जादुई चीज़ दी खुदा ने कहते हैं इसे खयाल,
इसके इख्तियार में बसा रहता है इन्सान का हाल।
मन में इस तरह यह हरदम यूं उछलता है,
वह पल जिसमें यह न हो, लगता है मुहाल।
क्या अजब है इसकी सिफ्त, हैरत में पड़े हैं हम,
हर सवाल का देता है जवाब, हर जवाब का सवाल।
पैदा होते ही हमें सताने लगता है दिन ओ रात,
फ़िर लगातार आता है, हालांकि सफेद हो जाएं बाल।
जो कहलाते हैं आज़ाद, वह भी रहते हैं इसके गुलाम,
सोच समझ के फंस जाते हैं, बुनता है जब यह जाल।
अमीर बन के रहते हैं, जिन्हें एहसास हो इसकी ताकत का,
कल ही तो उनको देखा था, पैदा हुए थे जो कंगाल।
लोग कहते हैं सारी कायनात माया ही है, रवि,
जो कुछ है वह है हमारे खयाल का कमाल।
शुभ प्रभात।