कौन कहता है अपने दोस्तों को
बहुत कीमती चीज़ दे सकते हो?
गर वक़्त नहीं दे सके तो सिर्फ
अपनी गफलत के दाग़ भरते हो।
दो पल तो किसी को दे न पाए,
क्या होगा इन नज़रानो से?
दिल बहलाने के ज़रिए बहुत हैं,
पर नहीं बहलता ऐसे बहानो से।
जब बूढ़े हो जाएं मां बाप कभी,
वो तुम्हारे वक़्त के हैं हकदार,
क्या तुम कभी भी न चुकाओगे,
जो ज़िन्दगी भर रहा है उधार?
प्यार की कीमत न लगाना,
आपसे मांगता है छोटी कुर्बानी,
नज़राना दो अपने वक़्त का,
गर कुछ कीमती देने की है ठानी।
शुभ प्रभात।