हमारी दिवाली में भी खुशियां थीं

ऐ दिवाली तू क्यों मुंह मोड़ आयी,
हमारी माँ को कहाँ तू छोड़ आयी?

उन संग हंसी के फवारे बुलंद थे,
तू तो दामन को ही अब निचोड़ आयी I

हमने रंग रंग के पटाखे इकठ्ठे फोड़े थे,
तू तो किस्मत ही हमारी फोड़ आयी I

कहाँ तो खुशियों के कारवां यहाँ निकलते थे,
अब तो ग़मों से रिश्ता तू जोड़ आयी I

उनका हाथ क्या थामा भरी महफ़िल में,
वही नाज़ुक कलाई तू मरोड़ आयी I

अगली बार आना तो माँ को भी साथ लाना,
हमारी माँ को कहाँ तू छोड़ आयी?

उनके बग़ैर दिवाली तू काली लगती है,
चाहे रंग ओ नूर तू लाखों करोड़ लायी I

Ai diwali tu kahan moonh mod aayi,
Hamaari maa ko kahan tu chhod aayi?

Un sang hansi ke fawaare buland the,
Tu to daaman ko hi ab nichod aayi.

Hamane rang rang ke pataakhe ikathhe phode the,
Tu to kismat hi hamaari phod aayi.

Kahan to khushiyon ke kaarvan yahan nikalte the,
Ab to ghamon se rishta tu jode aayi.

Unaka haath kyaa thama bhari mehfil mein,
Wohi naazuk kalaayi tu marod aayi.

Agli baar aana to maa ko bhi saath laana,
Hamaari maa ko kahan tu chhod aayi?

Unake bagair diwali tu kaali lagti hai,
Chaahe rang o noor tu laakhon crore laayi.

© 2017, Sunbyanyname. All rights reserved.

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8 Comments

  1. Ravi- I’m floored by the intensity of your attachment to Aunty. You’re a super human being 👏👏👏

  2. How very touching !!!I am sure your reverred mom is watching you miss her from heaven .

  3. Very touchy…. I very well can understand the intensity of your pain .,. Went through the same im 2009

  4. कोई शब्द नहीं बयान करने को मन की बात
    आपके हालात से मिलते हैं मेरे हालात….😒😒😒

    1. बहन हो इसलिए। मुझे पता है रेखा दीदी की और दीपक वीरजी की कितनी याद आती होगी आज।

      ईश्वर तुम्हें और मुझे शक्ति दे ग़म सहने की।