SULAGTE AANSU

 वो लौटा रहें हैं मेरा सामान,
और जला रहे हैं सब कुछ,
मेरी आरज़ू है सितमगर
मेरे अश्क भी जला दें
ताके दिल के समुन्दर में
वो तूफ़ान फिर ना उभरे;
जो मरहले खड़े थे
उन्हें ठोकर से मिटा दें
काश हम ना होते वो ना होते,
और ये आरज़ू ना होती
तेरी आँखों में जो सरूर था
वो सरूर भी हटा दें

मैं भूल गया हूँ सब कुछ,
तेरे प्यार की नज़र में
मेरी कौन सी है मंजिल
मुझे कुछ तो अब पता दें

अब दिल न हो, प्यार ना हो,
और ना रहे उनकी यादें,
कोई उनसे जाके कह दे,
मेरी हस्ती ही मिटा दें

Vo lauta rahe hain mera saamaan,
Aur jala rahen hain sab kuchh,
Meri araz hai sitamgar
Mere ashq bhi jala dein.

Taa ke dil ke samunder mein
Vo toofan phir na ubhre.
Jo marhale khade the
Unhein thokar se mita dein.

Kaash hum na hote vo na hote,
Aur ye aarzoo na hoti,
Teri aankhon mein jo saroor tha,
Vo saroor bhi hata dein.
 Main bhool gaya hoon sab kuchh,
Tere pyaar ki nazar mein.
Meri kaun si hai manzil,
Mujhe kuchh to ab pata dein.
Ab dil na ho, pyaar na ho,
Aur naa rahein unki yaadein,
Koi unse jaake keh de,
Meri hasti hi mita dein.

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